उत्तराखंड

आपदा से पहले सुरक्षा की ढाल: 28 संवेदनशील नदी तटों पर बड़े सुरक्षात्मक कार्यों को मंजूरी

देहरादून,  जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन को लेकर सक्रियता बढ़ाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा न्यूनीकरण कार्यों को मंजूरी प्रदान की है। जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समिति की बैठक में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अनुमोदित किया गया। बैठक में नदियों के चैनलाइजेशन एवं ड्रेजिंग कार्यों को हरी झंडी दी गई, साथ ही 28 जोखिमपूर्ण नदी तटों पर सुरक्षात्मक कार्यों को सशर्त स्वीकृति प्रदान की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा न्यूनीकरण कार्य सुधारात्मक प्रकृति के होते हैं और जनहित में इन्हें शीघ्र पूरा किया जाना आवश्यक है। उन्होंने विभागों को निर्देशित किया कि यदि अतिरिक्त प्रस्ताव या सुझाव हों तो उन्हें शीघ्र प्रस्तुत करें। साथ ही समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा ने बताया कि पूर्व में आपदाग्रस्त एवं संभावित क्षेत्रों के लिए विभिन्न विभागों से प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें नदी चैनलाइजेशन, रिवर ड्रेसिंग और भूस्खलन उपचार से जुड़े कार्य शामिल हैं। इन कार्यों को मार्च माह में ही स्वीकृति प्रदान कर दी गई है ताकि समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में हरिपुर कालसी क्षेत्र में यमुना नदी तट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए घाट निर्माण, सहिया क्षेत्र के कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर जजरेड में भूस्खलन न्यूनीकरण कार्य सहित विभिन्न योजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-507 पर पुल सुरक्षा, बोसाना व व्यासी में भूस्खलन उपचार, चंद्रभागा नदी किनारे रिवर ड्रेसिंग तथा जाखन ब्रिज क्षेत्र में मलबा हटाने जैसे कार्यों के लिए संयुक्त समिति गठित की गई है। समिति को स्थलीय निरीक्षण कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सह-अध्यक्ष सुखविंदर सिंह कौर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

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