उत्तराखंड

विश्वविद्यालय पर वित्तीय अनियमितता का आरोप, तोड़-फोड़ या जोड़-तोड़

टिहरी गढ़वाल: समाजसेवी एवं पूर्व नामित सभासद अंकित सजवान द्वारा श्री देव सुमन विश्वविद्यालय(SDSUV) के कुलसचिव को दिए ज्ञापन में विश्वविद्यालय पर काफ़ी गंभीर आरोप लगाये गए है, अंकित द्वारा आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में विगत वर्षों में विधायक निधि एवं ब्लॉक चंबा द्वारा एक भवन का निर्माण किया गया था। इस निर्माण हेतु श्री देव सुमन विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में ‘अनापत्ति प्रमाणपत्र’ (NOC) निर्गत किया गया था, जिसके उपरांत मुख्य विकास अधिकारी (CDO) एवं जिलाधिकारी (DM) महोदय द्वारा लगभग ₹5,00,000/- (पाँच लाख रुपये) की धनराशि स्वीकृत की गई थी।

चूंकि यह निर्माण पूर्णतः राजकीय धन से किया गया था, अतः यह भवन एक ‘राजकीय संपत्ति’ थी। वर्तमान में यह संज्ञान में आया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन(SDSUV) द्वारा उक्त भवन को बिना जिलाधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी महोदय की पूर्व अनुमति के ध्वस्त (Demolish) कर दिया गया है और उसके स्थान पर नवीन निर्माण कार्य किया जा रहा है।

नियमों का उल्लंघन:
विधायक निधि के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी निर्मित परिसंपत्ति को ध्वस्त करने से पूर्व जिला प्रशासन से उसे ‘निष्प्रोज्य’ (Condemned) घोषित करवाने की अनुमति लेना अनिवार्य है, जो कि इस प्रकरण में नहीं ली गई।

वित्तीय अनियमितता:
बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के सरकारी भवन को तोड़ना घोर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

सामग्री का दुरुपयोग:
पुराने भवन की ईंटों एवं पत्थरों का उपयोग बिना किसी मूल्यांकन या नीलामी प्रक्रिया के वर्तमान निर्माण में किया जा रहा है, जो राजस्व नियमों के विरुद्ध है।

अंकित सजवान द्वारा बिना अनुमति के नियमों के उल्लंघन पर उच्च अधिकारियों एवं शासन से कार्यवाही की माँग की है।

 

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