उत्तराखंड

द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खुले

देहरादून: श्री मदमहेश्वर मंदिर के कपाट  कर्क लग्न में पूर्वाह्न  श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही सम्पूर्ण धाम “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। मंदिर को रंग-बिरंगे पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया था तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

द्वितीय केदार के रूप में विख्यात भगवान मदमहेश्वर धाम में कपाटोत्सव के अवसर पर आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुजारी शिवशंकर लिंग ने कपाट खुलने की प्रक्रिया संपन्न कराई। इस दौरान भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि स्वरूप से श्रृंगार स्वरूप प्रदान किया गया। इससे पूर्व भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली भंडार कक्ष तक अवलोकन हेतु पहुंची।

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान मदमहेश्वर की कृपा समस्त भक्तों पर बनी रहे और सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो।

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि श्री मदमहेश्वर यात्रा को लेकर समिति द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ के अनुसार, भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर से प्रथम पड़ाव श्री राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हकहकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची तथा गुरुवार प्रातः वहां से प्रस्थान कर श्री मदमहेश्वर धाम पहुंची। निर्धारित मुहूर्त में कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

ज्ञातव्य है कि 19 मई को भीमाशंकर लिंग तथा बिजेंद्र बिष्ट ने विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह डोली को समारोहपूर्वक रवाना किया था। मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने बताया कि कपाट खुलने के प्रथम दिवस 1135 श्रद्धालु भगवान मदमहेश्वर के दर्शन के लिए धाम पहुंचे।

इस पावन अवसर पर मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दानीदाता दिनेश कानोड़िया, डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट, विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार, गणेश सेमवाल, प्रकाश पंवार सहित स्थानीय हकहकूकधारी, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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