उत्तराखंड

देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने सीएम से मिलने का समय मांगा

देहरादून: देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के मुख्यालय चंदननगर देहरादून में आज एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सचिव पेयजल, उत्तराखंड शासन से मुलाकात करने के बाद रखी गई। बैठक की अध्यक्षता देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने की। संस्था के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि ठेकेदारों को 2 वर्षों से लगातार सचिवालय, एस डब्लू एस एम कार्यालय एवं जल निगम, जल संस्थान के चक्कर काट कट कट कर पाओ घिस गए एवं थक चुके हैं फिर भी धन आवंटित न होने एवं प्रतिमा आश्वासन से परेशान होकर सचिव महोदय के आगे गुहार लगाई गई कि उनकी एसोसिएशन के पांच सदस्यीय दल को मुख्यमंत्री/ पेयजल मंत्री से मुलाकात कराकर अपनी समस्याओं का समाधान मांगा है।

अमित अग्रवाल ने कहा क्योंकि संगठन के ठेकेदारों में अत्यधिक रोष पैदा हो चुका है एवं बताया गया है कि ठेकेदारों या योजनाओं के साथ कोई भी अनहोनी हो सकती है उसका पूर्ण जिम्मेदारी सरकार और अधिकारियों की होगी। ठेकेदारों ने पूर्ण रखरखाव संचालन एवं अनुरक्षण करने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा जल जीवन मिशन ने ठेकेदारों का उनके साथ जुड़े मजदूर परिवारों सप्लायरों का जीवन समाप्त कर दिया है। संस्था के अध्यक्ष अमित अग्रवाल आगे बताते हैं कि सरकार द्वारा पैसा देने की मंशा नहीं प्रतीत होती है लगातार सरकार द्वारा पहले के एम एल फाइल बनाना, आर पी डब्लू एस एस आई डी बनाना, स्वजल आईडी, सुजलाम आईडी, एस एन ए पोर्टल बनाने के लिए बोला गया।

इन सभी में ठेकेदारों ने पूर्ण सहयोग कर सरकार का साथ दिया और वैसे ही किया परंतु स्पर्श पोर्टल पर आज तक कोई भी योजनाओं का रूपरेखा नहीं दिखाई दी। यहां तक की भारत सरकार से तीन माह पूर्व 32 करोड रुपए आज तक सरकार खर्च नहीं कर पाई है क्योंकि भारत सरकार के स्पर्श पोर्टल पर जल जीवन मिशन की योजना दिख नहीं रही हैं। जहां उत्तराखंड राज्य में 2000 करोड रुपए ठेकेदारों को बकाया राशि देनी है । इस सब परिस्थितियों को देखते हुए सरकार की मंशा साफ दिख रही है कि भुगतान नहीं करना या जानबूझकर पेमेंट रोकना है। उत्तराखंड राज्य में करोड रुपए जल जीवन मिशन के योजनाओं पर खर्च हो चुके हैं, वह अब बर्बाद होती हुई दिख रही है, इसमें सरकार और अधिकारी अपने ठीकरा ठेकेदारों पर पेनल्टी और ब्लैकलिस्ट करने के रूप में थोप रहे हैं। जिससे ठेकेदारों का कोई दोष नहीं है।

बीते दिनों देहरादून के डीएम द्वारा जल जीवन मिशन के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई है जिसमें सरकार खुद ही अपने सवालों के घेरे में पाए गए हैं अमित अग्रवाल ने बताया कि जो काम बकाया हैं उसमें ज्यादातर वन भूमि एवं नेशनल हाईवे की स्वीकृति को बताया गया है एवं समय से ठेकेदारों का भुगतान न होना मुख्य कारण भी है। ज्यादातर योजनाओं में ग्राम वासियों को पानी भी उपलब्ध करा दिया गया है परंतु रोड रिस्टेटमेंट जैसे कार्य कुछ योजनाओं में बकाया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई गई है कि ऐसी बहुत सी योजनाएं हैं जिसमें दो वर्षों से पानी की सप्लाई लोगों को दी जा रही है एवं जल निगम जल संस्थान द्वारा ग्रामीण वासियों को बिल देकर पैसा भी वसूला जा रहा है।

टी पी आई एवं हर घर जल प्रमाणीकरण करना ठेकेदारों के अनुबंध में नहीं है, परंतु उसका ठीकरा भी ठेकेदारों पर फोड़ा जा रहा है ठेकेदारों को पैसे की लालसा में 75% हर घर जल प्रमाणीकरण भी कर दिया गया है, परंतु कुछ ग्रामों में प्रमाणीकरण करना संभव है क्योंकि प्रमाणीकरण ग्राम प्रधान द्वारा करना है जबकि उन योजनाओं में 2 वर्षों से अधिक से क्षेत्र वासियों को पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अब भुगतान ना होने के कारण योजनाओं में जनता द्वारा या बिना देखभाल के जो भी नुकसान है या होगा उसकी जिम्मेदारी सरकार एवं अधिकारियों की होंगी। कोई भी ठेकेदार अब सरकार और अधिकारियों की लापरवाही का शिकार नहीं होगा। इन योजनाओं में काम कर बर्बाद हो चुके ठेकेदारों की सुनवाई का संज्ञान माननीय मुख्य मंत्री जी, माननीय प्रधानमंत्री जी और जल शक्ति मिशन ले और तत्काल कार्रवाई कर हम सभी ठेकेदारों का भुगतान जारी करे। बैठक में देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से सचिन मित्तल, सौरभ गोयल, सुनील गुप्ता, अंकित सालार एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button