उत्तराखंड

ऊंची उड़ान: 13,615 फीट ऊंचे दरवा टॉप पर पहुंचे एडिफाई वर्ल्ड स्कूल के छात्र

देहरादून–  एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं साहसिक व्यक्तित्व निर्माण के उद्देश्य से ‘डोडीताल–दरवा टॉप ट्रेक अभियान’ का सफल आयोजन किया गया। यह अभियान विद्यालय के निदेशक ‘एडवोकेट पंकज होलकर के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। ट्रेक की शुरुआत ‘संगमचट्टी (4,430 फीट)’ से हुई। इसके बाद दल ‘आगोड़ा गाँव (7,382 फीट)’, ‘बेबरा (8,000 फीट’ और ‘मांझी (10,050 फीट)’होते हुए मनमोहक डोडीताल (10,858 फीट) पहुँचा। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने कठिन चढ़ाई पार करते हुए 13,615 फीट की ऊँचाई पर स्थित दरवा टॉप पर सफलतापूर्वक पहुँचकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और टीम भावना का परिचय दिया।

इस साहसिक अभियान के दौरान विद्यार्थियों ने हिमालय की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण, धैर्य, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता तथा टीमवर्क जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को व्यवहारिक रूप से सीखा। अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए उनके शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित करना था। विद्यालय के निदेशक ‘एडवोकेट पंकज होलकर ने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि ऐसे अनुभव विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि एडिफाई वर्ल्ड स्कूल विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए समय-समय पर ऐसे साहसिक एवं अनुभवात्मक कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रदीप गौड़ ने ट्रेक को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने विद्यार्थियों के साहस, अनुशासन, दृढ़ संकल्प और टीम भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के साहसिक अभियान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को विकसित करते हैं और उन्हें जीवन की हर चुनौती का दृढ़ता एवं सकारात्मक सोच के साथ सामना करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह अभियान विद्यार्थियों के लिए रोमांच, सीख और प्रेरणा का अद्भुत संगम साबित हुआ। एडिफाई वर्ल्ड स्कूल, देहरादून का यह प्रयास एक बार फिर यह सिद्ध करता है कि विद्यालय केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, नेतृत्व विकास और जीवन कौशल के संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रतिबद्ध है।

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