उत्तराखंड

कथा केवल श्रवण नहीं, आत्मकल्याण का माध्यम है : बापू

हरिद्वार: की पावन भूमि पर तीसरे दिन के कथा संवाद में बापू ने “असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमय” सूत्र का भावार्थ समझाया। उन्होंने कहा कि असत्य से सत्य की ओर ले जाना सत्य है, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना प्रेम है और मृत्यु से अमृत की ओर ले जाना करुणा है।

बापू ने कहा कि बुद्धपुरुष केवल व्यक्ति या व्यक्तित्व नहीं, बल्कि अस्तित्व होता है। जिसमें पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पंचतत्वों के गुण जागृत हो जाएं, ऐसे साधु को स्वीकार करना चाहिए। सत्य का आचार, विचार, उच्चार और स्वीकार आवश्यक है।

उन्होंने अग्नि को सत्य, वायु को सहजता, आकाश को असंगता, पृथ्वी को धैर्य और जल को प्रवाह से जोड़ा। बापू ने कहा कि पंचतत्व अमृत हैं और कथा भी अमृत है, क्योंकि कथा अमृत मधुर होता है।

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