उत्तराखंड

शब्दों की महफिल में गूंजे सुर, यादगार बनी साहित्यिक शाम

देहरादून। शब्द जब सुरों से मिलते हैं तो संवेदनाएं और भी गहरी हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा  दून लाइब्रेरी में देखने को मिला, जहां लेखक विक्की आर्य की पुस्तक ‘चुल्लू भर चाँदनी’ पर आधारित विशेष साहित्यिक एवं सांगीतिक संध्या का आयोजन किया गया। रे माधव आर्ट्स द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का लोकार्पण इससे पूर्व दिल्ली में किया जा चुका है। केआरआई गैलरी के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक के चुनिंदा गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियों ने साहित्य एवं संगीत प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। पुस्तक के चयनित गीतों को अरुण भट्ट, जितेंद्र नवानी, ए. रॉय और शिवानी मिश्रा ने स्वर दिए हैं। प्रस्तुतियों के माध्यम से गीतों में रची-बसी भावनाओं, संवेदनाओं और कल्पनाओं को सुरों ने जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम में महाकुंभ को समर्पित गीत ‘ये कुंभ-कुंभ है महाकुंभ’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। लेखक विक्की आर्य द्वारा रचित इस गीत की प्रस्तुति ने श्रोताओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावभूमि से जोड़ दिया। आयोजकों के अनुसार यह गीत संगीत जगत के प्रतिष्ठित ग्रैमी अवॉर्ड के लिए भी नामांकित किया गया था।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. गोविंद सिंह, अध्यक्ष, मीडिया एडवाइजरी कमेटी, उत्तराखंड सरकार ने साहित्य और संगीत के इस अनूठे संगम की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के रचनात्मक आयोजन साहित्य, कला, संस्कृति और समाज के बीच संवाद को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल वीके अहलूवालिया (सेवानिवृत्त), डॉ. सविता मोहन, निदेशक उच्च शिक्षा, उत्तराखंड (सेवानिवृत्त), प्रो. ममता सिंह, प्राचार्य एमकेपी पीजी कॉलेज तथा माधव भान, प्रकाशक, रे माधव आर्ट्स मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ नन्हे कलाकारों वसुंधरा और यशवर्धन की मधुर प्रस्तुति से हुआ। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन और गायत्री मंत्र के सामूहिक गायन से वातावरण आध्यात्मिक एवं सांगीतिक ऊर्जा से भर उठा। साहित्य प्रेमी स्वीकृति आर्य ने ‘चुल्लू भर चाँदनी’ के प्रकाशन और पुस्तक की रचनात्मक यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसमें शब्दों और संगीत का सुंदर तालमेल देखने को मिलता है। उन्होंने महाकुंभ को समर्पित गीत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ है। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन लेखिका एवं कवयित्री मीनू गोयल चौधरी ने किया। साहित्य, कला और संगीत जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग इस अवसर पर उपस्थित रहे।

इनमें डॉ. सुशील उपाध्याय, बबीता, अनुराग काला, गीतकार अरुण भट्ट, अवनीत रस्तोगी, जगदीश बाबला, ज्ञानेन्द्र, शिवानी, अर्चना राय और जितेंद्र नवानी सहित अनेक साहित्य एवं संगीत प्रेमी शामिल रहे। ‘चुल्लू भर चाँदनी’ की यह संगीतमय यात्रा देहरादून की साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में एक नई कड़ी जोड़ गई। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जब साहित्य के शब्द संगीत के स्वरों से मिलते हैं तो रचना केवल पढ़ी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है।

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