उत्तराखंड

राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए ग्रामीणों का बेमियादी धरना : 2019 की घोषणा पर सवाल, प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव

रानीपोखरी/जोलीग्रांट । रानीपोखरी क्षेत्र में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) की स्थापना में सात वर्षों से चली आ रही देरी के खिलाफ ग्रामीणों और ग्राम प्रधान संगठन ने लिस्काबाद गांव की प्रस्तावित साइट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष अनुप चौहान ने बताया, “मार्च 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 10 एकड़ रेशम विभाग की भूमि पर देश की 22वीं एनएलयू का शिलान्यास किया गया था।

22 करोड़ रुपये के प्रस्ताव के साथ आश्वासन मिला, लेकिन आज तक भूमि अधिग्रहण तक नहीं हुआ। अब अफवाहें हैं कि यह जमीन किसी अन्य प्रोजेक्ट के लिए हस्तांतरित हो सकती है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” लिस्काबाद ग्राम प्रधान अनिल कुमार ने जोड़ा, “यह विश्वविद्यालय क्षेत्र को शैक्षिक हब बनाएगा, रोजगार बढ़ाएगा और पर्यटन को बढ़ावा देगा। देरी से युवाओं का भविष्य खतरे में है।” दो फरवरी को एसडीएम ऋषिकेश को सौंपे ज्ञापन में 15 दिनों की समयसीमा दी गई थी, जो व्यतीत हो चुकी है। धरने में महिलाएं और युवा भी शामिल हैं, जो नारों के साथ प्रशासन से तत्काल भूमि अधिग्रहण और निर्माण प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

स्थानीय निवासी पूनम देवी ने कहा, “यह हमारी पीढ़ी का सवाल है। विश्वविद्यालय बनेगा तो गांव की बेटियां वकील बनेंगी, विकास आएगा।” प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उच्च स्तरीय समीक्षा चल रही है, लेकिन ग्रामीणों को त्वरित कार्रवाई का इंतजार है। यह आंदोलन उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के विस्तार की मांग को नई गति दे सकता है।

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