उत्तराखंड

पहाड़ की आवाज़ अब पहुंचेगी देश-दुनिया तक, ‘पहाड़ों के बीच की दुनिया’ की नई पहल

देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों, गांवों, लोकसंस्कृति, पर्यटन, स्थानीय प्रतिभाओं और आम जनजीवन की वास्तविक तस्वीर को देश-दुनिया के सामने लाने के उद्देश्य से नई पत्रिका ‘पहाड़ों के बीच की दुनिया’ का विधिवत विमोचन किया गया। विमोचन समारोह में पत्रिका को पहाड़ की आवाज को व्यापक मंच देने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया गया। समारोह के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संचार विभाग के सचिव वैभव वालिया रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने की। पत्रिका के संपादक अमित जोशी ने अतिथियों एवं उपस्थित मीडिया प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए पत्रिका की परिकल्पना, उद्देश्यों और भावी कार्ययोजना की जानकारी दी।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यहां की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराएं, ग्रामीण जीवन, संघर्ष, स्थानीय प्रतिभाएं और सामाजिक सरोकार भी प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में ऐसी अनेक कहानियां और उपलब्धियां हैं, जिन्हें उचित मंच और अभिव्यक्ति की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि ‘पहाड़ों के बीच की दुनिया’ इसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ने वाली पत्रिका है। इसके माध्यम से प्रदेश के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, गांवों, पर्यटन स्थलों, लोककला एवं संस्कृति, स्थानीय प्रतिभाओं, सामाजिक सरोकारों तथा आम जनजीवन से जुड़ी उन अनकही कहानियों को सामने लाया जाएगा, जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चाओं से दूर रह जाती हैं।

मुख्य अतिथि वैभव वालिया ने पत्रिका के प्रकाशन पर संपादक एवं पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि पहाड़ की अपनी विशिष्ट पहचान, संस्कृति और जीवन-दृष्टि है। ऐसी पहलें उत्तराखंड की वास्तविक तस्वीर को व्यापक समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने पत्रिका की सफलता एवं निरंतरता के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि पहाड़ की आवाज केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उत्तराखंड के गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के संघर्ष, उपलब्धियों, प्रतिभाओं और सरोकारों को देश के सामने लाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ‘पहाड़ों के बीच की दुनिया’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि पहाड़ की बात को पहाड़ के लोगों के साथ और पहाड़ से बाहर तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है। संपादक अमित जोशी ने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य उन क्षेत्रों और लोगों को मंच प्रदान करना है, जिनकी कहानियां अक्सर मुख्यधारा से दूर रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि पत्रिका के माध्यम से सकारात्मक, तथ्यपरक और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। समारोह के अंत में ‘पहाड़ों के बीच की दुनिया—पहाड़ की बात, पहाड़ के लोगों के साथ’ के संकल्प को दोहराया गया। साथ ही मीडिया जगत एवं आम जनता से इस पहल को सहयोग, सुझाव और मार्गदर्शन प्रदान करने की अपील की गई।

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